श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

स एष जीवन् खलु सम्परेतो

वर्तेत योऽत्यन्तनृशंसितेन।

देहे मृते तं मनुजाः शपन्ति

गन्ता तमोऽन्धं तनुमानिनो ध्रुवम्॥ २२

sa eṣa jīvan khalu sampareto

varteta yo'tyantanṛśaṃsitena|

dehe mṛte taṃ manujāḥ śapanti

gantā tamo'ndhaṃ tanumānino dhruvam|| 22

अर्थ

वह मनुष्य तो जीवित रहनेपर भी मरा हुआ ही है, जो अत्यन्त क्रूरताका व्यवहार करता है। उसकी मृत्युके बाद लोग उसे गाली देते हैं। इतना ही नहीं, वह देहाभिमानियोंके योग्य घोर नरकमें भी अवश्य-अवश्य जाता है॥ २२॥

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