श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

देवक्या जठरे गर्भं शेषाख्यं धाम मामकम्।

तत् संनिकृष्य रोहिण्या उदरे संनिवेशय॥ ८

devakyā jaṭhare garbhaṃ śeṣākhyaṃ dhāma māmakam|

tat saṃnikṛṣya rohiṇyā udare saṃniveśaya|| 8

अर्थ

इस समय मेरा वह अंश जिसे शेष कहते हैं, देवकीके उदरमें गर्भ रूपसे स्थित है। उसे वहाँसे निकालकर तुम रोहिणीके पेटमें रख दो॥ ८॥

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