श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.2.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अथाहमंशभागेन देवक्याः पुत्रतां शुभे।

प्राप्स्यामि त्वं यशोदायां नन्दपत्‍न्यां भविष्यसि॥ ९

athāhamaṃśabhāgena devakyāḥ putratāṃ śubhe|

prāpsyāmi tvaṃ yaśodāyāṃ nandapatnyāṃ bhaviṣyasi|| 9

अर्थ

कल्याणी! अब मैं अपने समस्त ज्ञान, बल आदि अंशोंके साथ देवकीका पुत्र बनूँगा और तुम नन्दबाबाकी पत्‍नी यशोदाके गर्भसे जन्म लेना॥ ९॥

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