श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

अथ विंशोऽध्यायः

वर्षा और शरद्ऋतुका वर्णन

श्रीशुक उवाच

तयोस्तदद्भुतं कर्म दावा‌ग्‍नेर्मोक्षमात्मनः।

गोपाः स्त्रीभ्यः समाचख्युः प्रलम्बवधमेव च॥ १

tayostadadbhutaṃ karma dāvāgnermokṣamātmanaḥ|

gopāḥ strībhyaḥ samācakhyuḥ pralambavadhameva ca|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ग्वालबालोंने घर पहुँचकर अपनी मा, बहिन आदि स्त्रियोंसे श्रीकृष्ण और बलरामने जो कुछ अद्भुत कर्म किये थे—दावानलसे उनको बचाना, प्रलम्बको मारना इत्यादि—सबका वर्णन किया॥ १॥✎ 1424

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1424 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): माँ, → मा,

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