श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

क्वचिद् वनस्पतिक्रोडे गुहायां चाभिवर्षति।

निर्विश्य भगवान् रेमे कन्दमूलफलाशनः॥ २८

kvacid vanaspatikroḍe guhāyāṃ cābhivarṣati|

nirviśya bhagavān reme kandamūlaphalāśanaḥ|| 28

अर्थ

जब वर्षा होने लगती तब श्रीकृष्ण कभी किसी वृक्षकी गोदमें या खोड़रमें जा छिपते। कभी-कभी किसी गुफामें ही जा बैठते और कभी कन्द-मूल-फल खाकर ग्वालबालोंके साथ खेलते रहते॥ २८॥

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