श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.40

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

निश्‍चलाम्बुरभूत्तूष्णीं समुद्रः शरदागमे।

आत्मन्युपरते सम्यङ्मुनिर्व्युपरतागमः॥ ४०

niścalāmburabhūttūṣṇīṃ samudraḥ śaradāgame|

ātmanyuparate samyaṅmunirvyuparatāgamaḥ|| 40

अर्थ

शरद् ऋतुमें समुद्रका जल स्थिर, गम्भीर और शान्त हो गया—जैसे मनके निःसंकल्प हो जानेपर आत्माराम पुरुष कर्मकाण्डका झमेला छोड़कर शान्त हो जाता है॥ ४०॥

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