श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

निशामुखेषु खद्योतास्तमसा भान्ति न ग्रहाः।

यथा पापेन पाखण्डा न हि वेदाः कलौ युगे॥ ८

niśāmukheṣu khadyotāstamasā bhānti na grahāḥ|

yathā pāpena pākhaṇḍā na hi vedāḥ kalau yuge|| 8

अर्थ

वर्षाके सायंकालमें बादलोंसे घना अँधेरा छा जानेपर ग्रह और तारोंका प्रकाश तो नहीं दिखलायी पड़ता, परन्तु जुगनू चमकने लगते हैं—जैसे कलियुगमें पापकी प्रबलता हो जानेसे पाखण्ड मतोंका प्रचार हो जाता है और वैदिक सम्प्रदाय लुप्त हो जाते हैं॥ ८॥✎ 1664

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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