श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

श्रुत्वा पर्जन्यनिनदं मण्डूका व्यसृजन् गिरः।

तूष्णीं शयानाः प्राग् यद्वद् ब्राह्मणा नियमात्यये॥ ९

śrutvā parjanyaninadaṃ maṇḍūkā vyasṛjan giraḥ|

tūṣṇīṃ śayānāḥ prāg yadvad brāhmaṇā niyamātyaye|| 9

अर्थ

जो मेंढक पहले चुपचाप सो रहे थे, अब वे बादलोंकी गरज सुनकर टर्र-टर्र करने लगे—जैसे नित्य-नियमसे निवृत्त होनेपर गुरुके आदेशानुसार ब्रह्मचारी लोग वेदपाठ करने लगते हैं॥ ९॥✎ 1664

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1664 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: आदेशा-नुसार → आदेशानुसार

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें