श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

मां ज्ञापयत पत्‍नीभ्यः ससंकर्षणमागतम्।

दास्यन्ति काममन्‍नं वः स्निग्धा मय्युषिता धिया॥ १४

māṃ jñāpayata patnībhyaḥ sasaṃkarṣaṇamāgatam|

dāsyanti kāmamannaṃ vaḥ snigdhā mayyuṣitā dhiyā|| 14

अर्थ

‘मेरे प्यारे ग्वालबालो! इस बार तुमलोग उनकी पत्‍नियोंके पास जाओ और उनसे कहो कि राम और श्याम यहाँ आये हैं। तुम जितना चाहोगे उतना भोजन वे तुम्हें देंगी। वे मुझसे बड़ा प्रेम करती हैं। उनका मन सदा-सर्वदा मुझमें लगा रहता है’॥ १४॥

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