श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

नमो वो विप्रपत्‍नीभ्यो निबोधत वचांसि नः।

इतोऽविदूरे चरता कृष्णेनेहेषिता वयम्॥ १६

namo vo viprapatnībhyo nibodhata vacāṃsi naḥ|

ito'vidūre caratā kṛṣṇeneheṣitā vayam|| 16

अर्थ

‘आप विप्रपत्‍नियोंको हम नमस्कार करते हैं। आप कृपा करके हमारी बात सुनें। भगवान् श्रीकृष्ण यहाँसे थोड़ी ही दूरपर आये हुए हैं और उन्होंने ही हमें आपके पास भेजा है॥ १६॥

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