‘आप विप्रपत्नियोंको हम नमस्कार करते हैं। आप कृपा करके हमारी बात सुनें। भगवान् श्रीकृष्ण यहाँसे थोड़ी ही दूरपर आये हुए हैं और उन्होंने ही हमें आपके पास भेजा है॥ १६॥
नमो वो विप्रपत्नीभ्यो निबोधत वचांसि नः।
इतोऽविदूरे चरता कृष्णेनेहेषिता वयम्॥ १६
‘आप विप्रपत्नियोंको हम नमस्कार करते हैं। आप कृपा करके हमारी बात सुनें। भगवान् श्रीकृष्ण यहाँसे थोड़ी ही दूरपर आये हुए हैं और उन्होंने ही हमें आपके पास भेजा है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 283) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/23/16/