श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! जब ग्वालबालोंने देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्णसे इस प्रकार प्रार्थना की तब उन्होंने मथुराकी अपनी भक्त ब्राह्मणपत्नियोंपर अनुग्रह करनेके लिये यह बात कही—॥ २॥
इति विज्ञापितो गोपैर्भगवान् देवकीसुतः।
भक्ताया विप्रभार्यायाः प्रसीदन्निदमब्रवीत्॥ २
श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! जब ग्वालबालोंने देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्णसे इस प्रकार प्रार्थना की तब उन्होंने मथुराकी अपनी भक्त ब्राह्मणपत्नियोंपर अनुग्रह करनेके लिये यह बात कही—॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 281) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/23/2/