॥ श्रीहरिः ॥
प्रयात देवयजनं ब्राह्मणा ब्रह्मवादिनः।
सत्रमांगिरसं नाम ह्यासते स्वर्गकाम्यया॥ ३
prayāta devayajanaṃ brāhmaṇā brahmavādinaḥ|
satramāṃgirasaṃ nāma hyāsate svargakāmyayā|| 3
अर्थ
‘मेरे प्यारे मित्रो! यहाँसे थोड़ी ही दूरपर वेदवादी ब्राह्मण स्वर्गकी कामनासे आंगिरस नामका यज्ञ कर रहे हैं। तुम उनकी यज्ञशालामें जाओ॥ ३॥
प्रयात देवयजनं ब्राह्मणा ब्रह्मवादिनः।
सत्रमांगिरसं नाम ह्यासते स्वर्गकाम्यया॥ ३
‘मेरे प्यारे मित्रो! यहाँसे थोड़ी ही दूरपर वेदवादी ब्राह्मण स्वर्गकी कामनासे आंगिरस नामका यज्ञ कर रहे हैं। तुम उनकी यज्ञशालामें जाओ॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 281) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/23/3/