श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.4

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

तत्र गत्वौदनं गोपा याचतास्मद्विसर्जिताः।

कीर्तयन्तो भगवत आर्यस्य मम चाभिधाम्॥ ४

tatra gatvaudanaṃ gopā yācatāsmadvisarjitāḥ|

kīrtayanto bhagavata āryasya mama cābhidhām|| 4

अर्थ

ग्वालबालो! मेरे भेजनेसे वहाँ जाकर तुमलोग मेरे बड़े भाई भगवान् श्रीबलरामजीका और मेरा नाम लेकर कुछ थोड़ा-सा भात—भोजनकी सामग्री माँग लाओ’॥ ४॥

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