जब भगवान्ने ऐसी आज्ञा दी, तब ग्वालबाल उन ब्राह्मणोंकी यज्ञशालामें गये और उनसे भगवान्की आज्ञाके अनुसार ही अन्न माँगा। पहले उन्होंने पृथ्वीपर गिरकर दण्डवत् प्रणाम किया और फिर हाथ जोड़कर कहा—॥ ५॥
इत्यादिष्टा भगवता गत्वायाचन्त ते तथा।
कृतांजलिपुटा विप्रान् दण्डवत् पतिता भुवि॥ ५
जब भगवान्ने ऐसी आज्ञा दी, तब ग्वालबाल उन ब्राह्मणोंकी यज्ञशालामें गये और उनसे भगवान्की आज्ञाके अनुसार ही अन्न माँगा। पहले उन्होंने पृथ्वीपर गिरकर दण्डवत् प्रणाम किया और फिर हाथ जोड़कर कहा—॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 281) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/23/5/