श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.35

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

भगवानपि गोविन्दस्तेनैवान्‍नेन गोपकान्।

चतुर्विधेनाशयित्वा स्वयं च बुभुजे प्रभुः॥ ३५

bhagavānapi govindastenaivānnena gopakān|

caturvidhenāśayitvā svayaṃ ca bubhuje prabhuḥ|| 35

अर्थ

इधर भगवान् श्रीकृष्णने ब्राह्मणियोंके लाये हुए उस चार प्रकारके अन्‍नसे पहले ग्वाल-बालोंको भोजन कराया और फिर उन्होंने स्वयं भी भोजन किया॥ ३५॥

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