श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.47

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

देशः कालः पृथग्द्रव्यं मन्त्रतन्त्रर्त्विजोऽ‌ग्‍नयः।

देवता यजमानश्‍च क्रतुर्धर्मश्‍च यन्मयः॥ ४७

deśaḥ kālaḥ pṛthagdravyaṃ mantratantrartvijo'gnayaḥ|

devatā yajamānaśca kraturdharmaśca yanmayaḥ|| 47

अर्थ

देश, काल, पृथक्-पृथक् सामग्रियाँ, उन-उन कर्मोंमें विनियुक्त मन्त्र, अनुष्ठानकी पद्धति, ऋत्विज्, अग्‍नि, देवता, यजमान, यज्ञ और धर्म—सब भगवान्‌के ही स्वरूप हैं॥ ४७॥

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