वे ही योगेश्वरोंके भी ईश्वर भगवान् विष्णु स्वयं श्रीकृष्णके रूपमें यदुवंशियोंमें अवतीर्ण हुए हैं, यह बात हमने सुन रखी थी; परन्तु हम इतने मूढ हैं कि उन्हें पहचान न सके॥ ४८॥
स एष भगवान् साक्षाद् विष्णुर्योगेश्वरेश्वरः।
जातो यदुष्वित्यशृण्म ह्यपि मूढा न विद्महे॥ ४८
वे ही योगेश्वरोंके भी ईश्वर भगवान् विष्णु स्वयं श्रीकृष्णके रूपमें यदुवंशियोंमें अवतीर्ण हुए हैं, यह बात हमने सुन रखी थी; परन्तु हम इतने मूढ हैं कि उन्हें पहचान न सके॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 288) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/23/48/