ayaṃ gobrāhmaṇādrīṇāṃ mahyaṃ ca dayito makhaḥ|| 30
अर्थ
पिताजी! मेरी तो ऐसी ही सम्मति है। यदि आपलोगोंको रुचे तो ऐसा ही कीजिये। ऐसा यज्ञ गौ, ब्राह्मण और गिरिराजको तो प्रिय होगा ही; मुझे भी बहुत प्रिय है॥ ३०॥✎ 1667
एतन्मम मतं तात क्रियतां यदि रोचते।
अयं गोब्राह्मणाद्रीणां मह्यं च दयितो मखः॥ ३०
पिताजी! मेरी तो ऐसी ही सम्मति है। यदि आपलोगोंको रुचे तो ऐसा ही कीजिये। ऐसा यज्ञ गौ, ब्राह्मण और गिरिराजको तो प्रिय होगा ही; मुझे भी बहुत प्रिय है॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 292) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/24/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)