भगवान् श्रीकृष्ण गोपोंको विश्वास दिलानेके लिये गिरिराजके ऊपर एक दूसरा विशाल शरीर धारण करके प्रकट हो गये, तथा ‘मैं गिरिराज हूँ’ इस प्रकार कहते हुए सारी सामग्री आरोगने लगे॥ ३५॥✎ 2080
कृष्णस्त्वन्यतमं रूपं गोपविश्रम्भणं गतः।
शैलोऽस्मीति ब्रुवन् भूरि बलिमादद् बृहद्वपुः॥ ३५
भगवान् श्रीकृष्ण गोपोंको विश्वास दिलानेके लिये गिरिराजके ऊपर एक दूसरा विशाल शरीर धारण करके प्रकट हो गये, तथा ‘मैं गिरिराज हूँ’ इस प्रकार कहते हुए सारी सामग्री आरोगने लगे॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 293) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/24/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)