श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.36

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तस्मै नमो व्रजजनैः सह चक्रेऽऽत्मनाऽऽत्मने।

अहो पश्यत शैलोऽसौ रूपी नोऽनुग्रहं व्यधात्॥ ३६

tasmai namo vrajajanaiḥ saha cakre''tmanā''tmane|

aho paśyata śailo'sau rūpī no'nugrahaṃ vyadhāt|| 36

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्णने अपने उस स्वरूपको दूसरे व्रजवासियोंके साथ स्वयं भी प्रणाम किया और कहने लगे—‘देखो, कैसा आश्‍चर्य है! गिरिराजने साक्षात् प्रकट होकर हमपर कृपा की है॥ ३६॥

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