अतः इस समय आपलोग जो क्रियायोग करने जा रहे हैं, वह सुहृदोंके साथ विचारित—शास्त्रसम्मत है अथवा लौकिक ही है—मैं यह सब जानना चाहता हूँ; आप कृपा करके स्पष्टरूपसे बतलाइये’॥ ७॥
तत्र तावत् क्रियायोगो भवतां किं विचारितः।
अथवा लौकिकस्तन्मे पृच्छतः साधु भण्यताम्॥ ७
अतः इस समय आपलोग जो क्रियायोग करने जा रहे हैं, वह सुहृदोंके साथ विचारित—शास्त्रसम्मत है अथवा लौकिक ही है—मैं यह सब जानना चाहता हूँ; आप कृपा करके स्पष्टरूपसे बतलाइये’॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 290) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/24/7/