श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

तत्र तावत् क्रियायोगो भवतां किं विचारितः।

अथवा लौकिकस्तन्मे पृच्छतः साधु भण्यताम्॥ ७

tatra tāvat kriyāyogo bhavatāṃ kiṃ vicāritaḥ|

athavā laukikastanme pṛcchataḥ sādhu bhaṇyatām|| 7

अर्थ

अतः इस समय आपलोग जो क्रियायोग करने जा रहे हैं, वह सुहृदोंके साथ विचारित—शास्त्रसम्मत है अथवा लौकिक ही है—मैं यह सब जानना चाहता हूँ; आप कृपा करके स्पष्टरूपसे बतलाइये’॥ ७॥

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