श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.11

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

अत्यासारातिवातेन पशवो जातवेपनाः।

गोपा गोप्यश्‍च शीतार्ता गोविन्दं शरणं ययुः॥ ११

atyāsārātivātena paśavo jātavepanāḥ|

gopā gopyaśca śītārtā govindaṃ śaraṇaṃ yayuḥ|| 11

अर्थ

इस प्रकार मूसलधार वर्षा तथा झंझावातके झपाटेसे जब एक-एक पशु ठिठुरने और काँपने लगा, ग्वाल और ग्वालिनें भी ठंडके मारे अत्यन्त व्याकुल हो गयीं, तब वे सब-के-सब भगवान् श्रीकृष्णकी शरणमें आये॥ ११॥✎ 2081 2082

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2081 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2082 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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