मूसलधार वर्षासे सताये जानेके कारण सबने अपने-अपने सिर और बच्चोंको निहुककर अपने शरीरके नीचे छिपा लिया था और वे काँपते-काँपते भगवान्की चरणशरणमें पहुँचे॥ १२॥✎ 20812082
शिरः सुतांश्च कायेन प्रच्छाद्यासारपीडिताः।
वेपमाना भगवतः पादमूलमुपाययुः॥ १२
मूसलधार वर्षासे सताये जानेके कारण सबने अपने-अपने सिर और बच्चोंको निहुककर अपने शरीरके नीचे छिपा लिया था और वे काँपते-काँपते भगवान्की चरणशरणमें पहुँचे॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 295) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)