श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इन्द्रने इस प्रकार प्रलयके मेघोंको आज्ञा दी और उनके बन्धन खोल दिये। अब वे बड़े वेगसे नन्दबाबाके व्रजपर चढ़ आये और मूसलधार पानी बरसाकर सारे व्रजको पीड़ित करने लगे॥ ८॥✎ 20812082
इत्थं मघवताऽऽज्ञप्ता मेघा निर्मुक्तबन्धनाः।
नन्दगोकुलमासारैः पीडयामासुरोजसा॥ ८
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! इन्द्रने इस प्रकार प्रलयके मेघोंको आज्ञा दी और उनके बन्धन खोल दिये। अब वे बड़े वेगसे नन्दबाबाके व्रजपर चढ़ आये और मूसलधार पानी बरसाकर सारे व्रजको पीड़ित करने लगे॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 294) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)