॥ श्रीहरिः ॥
विद्योतमाना विद्युद्भिः स्तनन्तः स्तनयित्नुभिः।
तीव्रैर्मरुद्गणैर्नुन्ना ववृषुर्जलशर्कराः॥ ९
vidyotamānā vidyudbhiḥ stanantaḥ stanayitnubhiḥ|
tīvrairmarudgaṇairnunnā vavṛṣurjalaśarkarāḥ|| 9
अर्थ
चारों ओर बिजलियाँ चमकने लगीं, बादल आपसमें टकराकर कड़कने लगे और प्रचण्ड आँधीकी प्रेरणासे वे बड़े-बड़े ओले बरसाने लगे॥ ९॥✎ 2081 2082
विद्योतमाना विद्युद्भिः स्तनन्तः स्तनयित्नुभिः।
तीव्रैर्मरुद्गणैर्नुन्ना ववृषुर्जलशर्कराः॥ ९
चारों ओर बिजलियाँ चमकने लगीं, बादल आपसमें टकराकर कड़कने लगे और प्रचण्ड आँधीकी प्रेरणासे वे बड़े-बड़े ओले बरसाने लगे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 294) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
- #2081 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
- #2082 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि