श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.9

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

विद्योतमाना विद्युद्भिः स्तनन्तः स्तनयित्‍नुभिः।

तीव्रैर्मरुद्गणैर्नुन्‍ना ववृषुर्जलशर्कराः॥ ९

vidyotamānā vidyudbhiḥ stanantaḥ stanayitnubhiḥ|

tīvrairmarudgaṇairnunnā vavṛṣurjalaśarkarāḥ|| 9

अर्थ

चारों ओर बिजलियाँ चमकने लगीं, बादल आपसमें टकराकर कड़कने लगे और प्रचण्ड आँधीकी प्रेरणासे वे बड़े-बड़े ओले बरसाने लगे॥ ९॥✎ 2081 2082

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2081 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2082 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें