॥ श्रीहरिः ॥
प्रलम्बं घातयित्वोग्रं बलेन बलशालिना।
अमोचयद् व्रजपशून् गोपांश्चारण्यवह्नितः॥ ११
pralambaṃ ghātayitvograṃ balena balaśālinā|
amocayad vrajapaśūn gopāṃścāraṇyavahnitaḥ|| 11
अर्थ
इसीने बलशाली बलरामजीके द्वारा क्रूर प्रलम्बासुरको मरवा डाला तथा दावानलसे गौओं और ग्वालबालोंको उबार लिया॥ ११॥
प्रलम्बं घातयित्वोग्रं बलेन बलशालिना।
अमोचयद् व्रजपशून् गोपांश्चारण्यवह्नितः॥ ११
इसीने बलशाली बलरामजीके द्वारा क्रूर प्रलम्बासुरको मरवा डाला तथा दावानलसे गौओं और ग्वालबालोंको उबार लिया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.26.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 299) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/26/11/