॥ श्रीहरिः ॥
इन्द्रं नस्त्वाभिषेक्ष्यामो ब्रह्मणा नोदिता वयम्।
अवतीर्णोऽसि विश्वात्मन् भूमेर्भारापनुत्तये॥ २१
indraṃ nastvābhiṣekṣyāmo brahmaṇā noditā vayam|
avatīrṇo'si viśvātman bhūmerbhārāpanuttaye|| 21
अर्थ
हम गौएँ ब्रह्माजीकी प्रेरणासे आपको अपना इन्द्र मानकर अभिषेक करेंगी। विश्वात्मन्! आपने पृथ्वीका भार उतारनेके लिये ही अवतार धारण किया है॥ २१॥
इन्द्रं नस्त्वाभिषेक्ष्यामो ब्रह्मणा नोदिता वयम्।
अवतीर्णोऽसि विश्वात्मन् भूमेर्भारापनुत्तये॥ २१
हम गौएँ ब्रह्माजीकी प्रेरणासे आपको अपना इन्द्र मानकर अभिषेक करेंगी। विश्वात्मन्! आपने पृथ्वीका भार उतारनेके लिये ही अवतार धारण किया है॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.27.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 303) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/27/21/