श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.27.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

तं तुष्टुवुर्देवनिकायकेतवो

व्यवाकिरंश्‍चाद्भुतपुष्पवृष्टिभिः।

लोकाः परां निर्वृतिमाप्नुवंस्त्रयो

गावस्तदा गामनयन् पयोद्रुताम्॥ २५

taṃ tuṣṭuvurdevanikāyaketavo

vyavākiraṃścādbhutapuṣpavṛṣṭibhiḥ|

lokāḥ parāṃ nirvṛtimāpnuvaṃstrayo

gāvastadā gāmanayan payodrutām|| 25

अर्थ

मुख्य-मुख्य देवता भगवान्‌की स्तुति करके उनपर नन्दनवनके दिव्य पुष्पोंकी वर्षा करने लगे। तीनों लोकोंमें परमानन्दकी बाढ़ आ गयी और गौओंके स्तनोंसे आप-ही-आप इतना दूध गिरा कि पृथ्वी गीली हो गयी॥ २५॥

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