इति गोगोकुलपतिं गोविन्दमभिषिच्य सः।
अनुज्ञातो ययौ शक्रो वृतो देवादिभिर्दिवम्॥ २८
इन्द्रने इस प्रकार गौ और गोकुलके स्वामी श्रीगोविन्दका अभिषेक किया और उनसे अनुमति प्राप्त होनेपर देवता, गन्धर्व आदिके साथ स्वर्गकी यात्रा की॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.27.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 304) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/27/28/