श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.28.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

वरुण उवाच

अद्य मे निभृतो देहोऽद्यैवार्थोऽधिगतः प्रभो।

त्वत्पादभाजो भगवन्‍नवापुः पारमध्वनः॥ ५

adya me nibhṛto deho'dyaivārtho'dhigataḥ prabho|

tvatpādabhājo bhagavannavāpuḥ pāramadhvanaḥ|| 5

अर्थ

वरुणजीने कहा—प्रभो! आज मेरा शरीर धारण करना सफल हुआ। आज मुझे सम्पूर्ण पुरुषार्थ प्राप्त हो गया; क्योंकि आज मुझे आपके चरणोंकी सेवाका शुभ अवसर प्राप्त हुआ है। भगवन्! जिन्हें भी आपके चरणकमलोंकी सेवाका सुअवसर मिला, वे भवसागरसे पार हो गये॥ ५॥

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