श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.29.19

दशम स्कन्ध · अध्याय 29 · अथैकोनत्रिंशोऽध्यायः

रजन्येषा घोररूपा घोरसत्त्वनिषेविता।

प्रतियात व्रजं नेह स्थेयं स्त्रीभिः सुमध्यमाः॥ १९

rajanyeṣā ghorarūpā ghorasattvaniṣevitā|

pratiyāta vrajaṃ neha stheyaṃ strībhiḥ sumadhyamāḥ|| 19

अर्थ

सुन्दरी गोपियो! रातका समय है, यह स्वयं ही बड़ा भयावना होता है और इसमें बड़े-बड़े भयावने जीव-जन्तु इधर-उधर घूमते रहते हैं। अतः तुम सब तुरंत व्रजमें लौट जाओ। रातके समय घोर जंगलमें स्त्रियोंको नहीं रुकना चाहिये॥ १९॥✎ 1818

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1818 अक्षर (एक स्थानपर, प्रमाणसहित): सेवा → और सतियोंकी सेवा

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