श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.3.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

उपसंहर विश्‍वात्मन्‍नदो रूपमलौकिकम्।

शंखचक्रगदापद्मश्रिया जुष्टं चतुर्भुजम्॥ ३०

upasaṃhara viśvātmannado rūpamalaukikam|

śaṃkhacakragadāpadmaśriyā juṣṭaṃ caturbhujam|| 30

अर्थ

विश्‍वात्मन्! आपका यह रूप अलौकिक है। आप शंख, चक्र, गदा और कमलकी शोभासे युक्त अपना यह चतुर्भुजरूप छिपा लीजिये॥ ३०॥

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