॥ श्रीहरिः ॥
कस्याः पदानि चैतानि याताया नन्दसूनुना।
अंसन्यस्तप्रकोष्ठायाः करेणोः करिणा यथा॥ २७
kasyāḥ padāni caitāni yātāyā nandasūnunā|
aṃsanyastaprakoṣṭhāyāḥ kareṇoḥ kariṇā yathā|| 27
अर्थ
‘जैसे हथिनी अपने प्रियतम गजराजके साथ गयी हो, वैसे ही नन्दनन्दन श्यामसुन्दरके साथ उनके कंधेपर हाथ रखकर चलनेवाली किस बड़भागिनीके ये चरणचिह्न हैं?॥ २७॥
कस्याः पदानि चैतानि याताया नन्दसूनुना।
अंसन्यस्तप्रकोष्ठायाः करेणोः करिणा यथा॥ २७
‘जैसे हथिनी अपने प्रियतम गजराजके साथ गयी हो, वैसे ही नन्दनन्दन श्यामसुन्दरके साथ उनके कंधेपर हाथ रखकर चलनेवाली किस बड़भागिनीके ये चरणचिह्न हैं?॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.30.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 320) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/30/27/