श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

अनयाऽऽराधितो नूनं भगवान् हरिरीश्‍वरः।

यन्‍नो विहाय गोविन्दः प्रीतो यामनयद् रहः॥ २८

anayā''rādhito nūnaṃ bhagavān harirīśvaraḥ|

yanno vihāya govindaḥ prīto yāmanayad rahaḥ|| 28

अर्थ

अवश्य ही सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्णकी यह ‘आराधिका’ होगी। इसीलिये इसपर प्रसन्‍न होकर हमारे प्राणप्यारे श्यामसुन्दरने हमें छोड़ दिया है और इसे एकान्तमें ले गये हैं॥ २८॥

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