श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.30.39

दशम स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

एवमुक्तः प्रियामाह स्कन्ध आरुह्यतामिति।

ततश्‍चान्तर्दधे कृष्णः सा वधूरन्वतप्यत॥ ३९

evamuktaḥ priyāmāha skandha āruhyatāmiti|

tataścāntardadhe kṛṣṇaḥ sā vadhūranvatapyata|| 39

अर्थ

अपनी प्रियतमाकी यह बात सुनकर श्यामसुन्दरने कहा—‘अच्छा प्यारी! तुम अब मेरे कंधेपर चढ़ लो।’ यह सुनकर वह गोपी ज्यों ही उनके कंधेपर चढ़ने चली, त्यों ही श्रीकृष्ण अन्तर्धान हो गये और वह सौभाग्यवती गोपी रोने-पछताने लगी॥ ३९॥

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