एक गोपी नृत्य करते-करते थक गयी। उसकी कलाइयोंसे कंगन और चोटियोंसे बेलाके फूल खिसकने लगे। तब उसने अपने बगलमें ही खड़े मुरलीमनोहर श्यामसुन्दरके कंधेको अपनी बाँहसे कसकर पकड़ लिया॥ ११॥✎ 2090
काचिद् रासपरिश्रान्ता पार्श्वस्थस्य गदाभृतः।
जग्राह बाहुना स्कन्धं श्लथद्वलयमल्लिका॥ ११
एक गोपी नृत्य करते-करते थक गयी। उसकी कलाइयोंसे कंगन और चोटियोंसे बेलाके फूल खिसकने लगे। तब उसने अपने बगलमें ही खड़े मुरलीमनोहर श्यामसुन्दरके कंधेको अपनी बाँहसे कसकर पकड़ लिया॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.33.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 333) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/33/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)