श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

तयोर्निरीक्षतो राजंस्तन्‍नाथं प्रमदाजनम्।

क्रोशन्तं कालयामास दिश्युदीच्यामशंकितः॥ २६

tayornirīkṣato rājaṃstannāthaṃ pramadājanam|

krośantaṃ kālayāmāsa diśyudīcyāmaśaṃkitaḥ|| 26

अर्थ

परीक्षित्! दोनों भाइयोंके देखते-देखते वह उन गोपियोंको लेकर बेखटके उत्तरकी ओर भाग चला। जिनके एकमात्र स्वामी भगवान् श्रीकृष्ण ही हैं, वे गोपियाँ उस समय रो-रोकर चिल्लाने लगीं॥ २६॥

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