श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

क्रोशन्तं कृष्ण रामेति विलोक्य स्वपरिग्रहम्।

यथा गा दस्युना ग्रस्ता भ्रातरावन्वधावताम्॥ २७

krośantaṃ kṛṣṇa rāmeti vilokya svaparigraham|

yathā gā dasyunā grastā bhrātarāvanvadhāvatām|| 27

अर्थ

दोनों भाइयोंने देखा कि जैसे कोई डाकू गौओंको लूट ले जाय, वैसे ही यह यक्ष हमारी प्रेयसियोंको लिये जा रहा है और वे ‘हा कृष्ण! हा राम!’ पुकारकर रो-पीट रही हैं। उसी समय दोनों भाई उसकी ओर दौड़ पड़े॥ २७॥

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