किन्तु लुकाठियोंसे मारे जाने और जलनेपर भी अजगरने नन्दबाबाको छोड़ा नहीं। इतनेमें ही भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्णने वहाँ पहुँचकर अपने चरणोंसे उस अजगरको छू दिया॥ ८॥✎ 16702092
अलातैर्दह्यमानोऽपि नामुञ्चत्तमुरङ्गमः।
तमस्पृशत् पदाभ्येत्य भगवान् सात्वतां पतिः॥ ८
किन्तु लुकाठियोंसे मारे जाने और जलनेपर भी अजगरने नन्दबाबाको छोड़ा नहीं। इतनेमें ही भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्णने वहाँ पहुँचकर अपने चरणोंसे उस अजगरको छू दिया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.34.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 347) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/34/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)