श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.34.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 34 · अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायः

अलातैर्दह्यमानोऽपि नामुञ्चत्तमुरङ्गमः।

तमस्पृशत् पदाभ्येत्य भगवान् सात्वतां पतिः॥ ८

alātairdahyamāno'pi nāmuñcattamuraṅgamaḥ|

tamaspṛśat padābhyetya bhagavān sātvatāṃ patiḥ|| 8

अर्थ

किन्तु लुकाठियोंसे मारे जाने और जलनेपर भी अजगरने नन्दबाबाको छोड़ा नहीं। इतनेमें ही भक्तवत्सल भगवान् श्रीकृष्णने वहाँ पहुँचकर अपने चरणोंसे उस अजगरको छू दिया॥ ८॥✎ 1670 2092

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1670 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: सर्वांग-सुन्दर → सर्वांगसुन्दर
  • #2092 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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