श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.24

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

भवद‍्भ्यामिह सम्प्राप्तौ हन्येतां मल्ललीलया।

मंचाः क्रियन्तां विविधा मल्लरङ्गपरिश्रिताः।

पौरा जानपदाः सर्वे पश्यन्तु स्वैरसंयुगम्॥ २४

bhavadbhyāmiha samprāptau hanyetāṃ mallalīlayā|

maṃcāḥ kriyantāṃ vividhā mallaraṅgapariśritāḥ|

paurā jānapadāḥ sarve paśyantu svairasaṃyugam|| 24

अर्थ

अतः जब वे यहाँ आवें, तब तुमलोग उन्हें कुश्ती लड़ने-लड़ानेके बहाने मार डालना। अब तुमलोग भाँति-भाँतिके मंच बनाओ और उन्हें अखाड़ेके चारों ओर गोल-गोल सजा दो। उनपर बैठकर नगरवासी और देशकी दूसरी प्रजा इस स्वच्छन्द दंगलको देखें॥ २४॥

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