श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.30

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

गच्छ नन्दव्रजं तत्र सुतावानकदुन्दुभेः।

आसाते ताविहानेन रथेनानय मा चिरम्॥ ३०

gaccha nandavrajaṃ tatra sutāvānakadundubheḥ|

āsāte tāvihānena rathenānaya mā ciram|| 30

अर्थ

आप नन्दरायके व्रजमें जाइये। वहाँ वसुदेवजीके दो पुत्र हैं। उन्हें इसी रथपर चढ़ाकर यहाँ ले आइये। बस, अब इस काममें देर नहीं होनी चाहिये॥ ३०॥

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