श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

निसृष्टः किल मे मृत्युर्देवैर्वैकुण्ठसंश्रयैः।

तावानय समं गोपैर्नन्दाद्यैः साभ्युपायनैः॥ ३१

nisṛṣṭaḥ kila me mṛtyurdevairvaikuṇṭhasaṃśrayaiḥ|

tāvānaya samaṃ gopairnandādyaiḥ sābhyupāyanaiḥ|| 31

अर्थ

सुनते हैं, विष्णुके भरोसे जीनेवाले देवताओंने उन दोनोंको मेरी मृत्युका कारण निश्‍चित किया है। इसलिये आप उन दोनोंको तो ले ही आइये, साथ ही नन्द आदि गोपोंको भी बड़ी-बड़ी भेंटोंके साथ ले आइये॥ ३१॥

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