परीक्षित्! उस तीखे सींगवाले बैलको देखकर गोपियाँ और गोप सभी भयभीत हो गये। पशु तो इतने डर गये कि अपने रहनेका स्थान छोड़कर भाग ही गये॥ ५॥
तं तीक्ष्णशृङ्गमुद्वीक्ष्य गोप्यो गोपाश्च तत्रसुः।
पशवो दुद्रुवुर्भीता राजन् संत्यज्य गोकुलम्॥ ५
परीक्षित्! उस तीखे सींगवाले बैलको देखकर गोपियाँ और गोप सभी भयभीत हो गये। पशु तो इतने डर गये कि अपने रहनेका स्थान छोड़कर भाग ही गये॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.36.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 357) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/36/5/