श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.6

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

कृष्ण कृष्णेति ते सर्वे गोविन्दं शरणं ययुः।

भगवानपि तद् वीक्ष्य गोकुलं भयविद्रुतम्॥ ६

kṛṣṇa kṛṣṇeti te sarve govindaṃ śaraṇaṃ yayuḥ|

bhagavānapi tad vīkṣya gokulaṃ bhayavidrutam|| 6

अर्थ

उस समय सभी व्रजवासी ‘श्रीकृष्ण! श्रीकृष्ण! हमें इस भयसे बचाओ’ इस प्रकार पुकारते हुए भगवान् श्रीकृष्णकी शरणमें आये। भगवान्‌ने देखा कि हमारा गोकुल अत्यन्त भयातुर हो रहा है॥ ६॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें