श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.36.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 36 · अथ षट्त्रिंशोऽध्यायः

मा भैष्टेति गिराऽऽश्‍वास्य वृषासुरमुपाह्वयत्।

गोपालैः पशुभिर्मन्द त्रासितैः किमसत्तम॥ ७

mā bhaiṣṭeti girā''śvāsya vṛṣāsuramupāhvayat|

gopālaiḥ paśubhirmanda trāsitaiḥ kimasattama|| 7

अर्थ

तब उन्होंने ‘डरनेकी कोई बात नहीं है’—यह कहकर सबको ढाढ़स बँधाया और फिर वृषासुरको ललकारा, ‘अरे मूर्ख! महादुष्ट! तू इन गौओं और ग्वालोंको क्यों डरा रहा है? इससे क्या होगा॥ ७॥

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