श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.37.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 37 · अथ सप्तत्रिंशोऽध्यायः

पौण्ड्रकस्य वधं पश्‍चात् काशिपुर्याश्‍च दीपनम्।

दन्तवक्त्रस्य निधनं चैद्यस्य च महाक्रतौ॥ २०

pauṇḍrakasya vadhaṃ paścāt kāśipuryāśca dīpanam|

dantavaktrasya nidhanaṃ caidyasya ca mahākratau|| 20

अर्थ

इसके पश्‍चात् आप पौण्ड्रक—मिथ्यावासुदेवका वध करेंगे। काशीपुरीको जला देंगे। युधिष्ठिरके राजसूय-यज्ञमें चेदिराज शिशुपालको और वहाँसे लौटते समय उसके मौसेरे भाई दन्तवक्त्रको नष्ट करेंगे॥ २०॥

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