श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.37.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 37 · अथ सप्तत्रिंशोऽध्यायः

यानि चान्यानि वीर्याणि द्वारकामावसन् भवान्।

कर्ता द्रक्ष्याम्यहं तानि गेयानि कविभिर्भुवि॥ २१

yāni cānyāni vīryāṇi dvārakāmāvasan bhavān|

kartā drakṣyāmyahaṃ tāni geyāni kavibhirbhuvi|| 21

अर्थ

प्रभो! द्वारकामें निवास करते समय आप और भी बहुत-से पराक्रम प्रकट करेंगे जिन्हें पृथ्वीके बड़े-बड़े ज्ञानी और प्रतिभाशील पुरुष आगे चलकर गायेंगे। मैं वह सब देखूँगा॥ २१॥

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