श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.37.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 37 · अथ सप्तत्रिंशोऽध्यायः

अथ ते कालरूपस्य क्षपयिष्णोरमुष्य वै।

अक्षौहिणीनां निधनं द्रक्ष्याम्यर्जुनसारथेः॥ २२

atha te kālarūpasya kṣapayiṣṇoramuṣya vai|

akṣauhiṇīnāṃ nidhanaṃ drakṣyāmyarjunasāratheḥ|| 22

अर्थ

इसके बाद आप पृथ्वीका भार उतारनेके लिये कालरूपसे अर्जुनके सारथि बनेंगे और अनेक अक्षौहिणी सेनाका संहार करेंगे। यह सब मैं अपनी आँखोंसे देखूँगा॥ २२॥

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