श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.38.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 38 · अथाष्टात्रिंशोऽध्यायः

गच्छन् पथि महाभागो भगवत्यम्बुजेक्षणे।

भक्तिं परामुपगत एवमेतदचिन्तयत्॥ २

gacchan pathi mahābhāgo bhagavatyambujekṣaṇe|

bhaktiṃ parāmupagata evametadacintayat|| 2

अर्थ

परम भाग्यवान् अक्रूरजी व्रजकी यात्रा करते समय मार्गमें कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णकी परम प्रेममयी भक्तिसे परिपूर्ण हो गये। वे इस प्रकार सोचने लगे—॥ २॥

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