श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.38.37

दशम स्कन्ध · अध्याय 38 · अथाष्टात्रिंशोऽध्यायः

संकर्षणश्‍च प्रणतमुपगुह्य महामनाः।

गृहीत्वा पाणिना पाणी अनयत् सानुजो गृहम्॥ ३७

saṃkarṣaṇaśca praṇatamupaguhya mahāmanāḥ|

gṛhītvā pāṇinā pāṇī anayat sānujo gṛham|| 37

अर्थ

इसके बाद जब वे परम मनस्वी श्रीबलरामजीके सामने विनीत भावसे खड़े हो गये, तब उन्होंने उनको गले लगा लिया और उनका एक हाथ श्रीकृष्णने पकड़ा तथा दूसरा बलरामजीने। दोनों भाई उन्हें घर ले गये॥ ३७॥

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